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Worldwide Clear Air Day for Blue Skies: नीले आसमान के लिए पहला इंटरनेशनल क्लीन एयर डे आज


International Clean Air Day for Blue Skies: नीले आसमान के लिए पहला इंटरनेशनल क्लीन एयर डे आज

नीला आसमान (Picture Credit: Wikipedia)

पूरी दुनिया न्यू नॉर्मल की ओर बढ़ रही है. न्यू नॉर्मल में हर व्‍यक्ति के जीने का तरीका पहले से बिलकुल अलग होगा. खाने-पीने से लेकर घूमने फिरने तक, उठने-बैठने से लेकर काम काज के तरीकों तक, सब बदल चुका है. इन सबके बीच जो एक बात सामने आयी है, वो यह भी है कि अब लोग प्रदूषण के प्रति पहले से ज्यादा सजग हो गए हैं. खास कर वायु प्रदूषण के प्रति. दरअसल लॉकडाउन के दौरान इतनी साफ हवा मिली, कि अब हर कोई चाहता है कि वैसी ही हवा में वो सांस लें. इसी बदलाव के तहत संयुक्त राष्‍ट्र के आह्वान पर आज यानी 7 सितंबर 2020 को पहला नीले आसमान के लिए पहला क्लीन एयर डे (Worldwide Day of Clear Air for blue skies) मनाया जा रहा है.

लोगों की सोच में आये इस बदलाव से दुनिया में अधिकांश जगह वायु प्रदूषण की समस्या को राहत मिलती नजर आ रही  है. लोग साइकिल से चलने लगे हैं और दुनिया भर के शहर इस शिफ्ट का समर्थन करने के लिए तेजी से आगे बढ़े हैं. कोविड महामारी की शुरुआत में 2,000 किमी से अधिक नई साइकिल लेनों की घोषणा की गई. और तो और कोविड-19 महामारी के जवाब में दुनिया भर के शहर लॉकडाउन में चले गए, दुनिया भर के लोगों ने कम औद्योगिक गतिविधि और परिवहन संस्करणों से हवा की गुणवत्ता में सुधार के परिणामस्वरूप स्पष्ट, नीले आसमान को देखा.

इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस एक वीडियो जारी करेंगे. जिसमें वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पर्यावरण मानकों, नीतियों और कानूनों को लागू करने, जीवाश्म ईंधन के लिए सब्सिडी का अंत करने, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के लिए संक्रमण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग करने और सरकारों को विकासशील देशों में जीवाश्म ईंधन संबंधित परियोजनाओं के किसी भी मौजूदा वित्त को स्वच्छ ऊर्जा और सतत परिवहन की दिशा में स्थानांतरित करने पर जोर दिया जाएगा.

स्वच्छ हवा के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदम 

इसी दौरान भारत के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर (Prakash Javadekar) ने देश भर में 200 शहरी वन विकसित करने की घोषणा की. इस घोषणा के तहत देश भर में वन विभाग, नगर निकायों, गैर सरकारी संगठनों, कॉर्पोरेट्स और स्‍थानीय नागरिकों के बीच भागीदारी और सहयोग पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए अगले पांच वर्षों में देश भर में 200 शहरी वन विकसित करने के लिए नगर वन योजना को क्रियान्वित किया जाएगा. इससे शहरों की हवा में घुलने वाले वायु प्रदूषण में कमी आयेगी.

बीते 5 जून को विश्‍व पर्यावरण दिवस के मौके पर इस परियोजना का ऐलान करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा था, “भारत संभवतः एकमात्र ऐसा देश है जहां पेड़ों की पूजा की जाती है, जहां जानवरों, पक्षियों और सरीसृपों की पूजा कीजाती है और यह पर्यावरण के लिए भारतीय समाज का सम्मान है. उन्‍होंने कहा कि हमारे पास युगों से गांव के जंगल की बहुत ही महत्वपूर्ण परंपरा हुआ करती थी, अब शहरी वन संबंधी इस नई योजना से इस खाई को भरा जा सकेगा क्योंकि शहरी क्षेत्रों में उद्यान तो हैं लेकिन जंगल बहुत ही कम हैं; शहरी वन बनाने की इस गतिविधि के साथ हम अतिरिक्त कार्बन सिंक भी तैयार करेंगे.”

क्या कहता है यूरोप का सर्वेक्षण 

यूरोप में लगभग दो-तिहाई लोगों ने कहा कि वे वायु प्रदूषण के पूर्व-महामारी के स्तर पर वापस नहीं लौटना चाहते हैं, और 68% लोगों का कहना है कि वे वायु प्रदूषण को कम करने वाली नीतियां – जिनमे शहर के केंद्रों में कारों पर प्रतिबंध लगाना शामिल हो – बरकरार रखना – चाहते हैं.

लोग साइकिल चलाना और पैदल चलना बड़ी संख्या में पसंद कर रहे हैं – कोविड-19 महामारी के परिणामस्वरूप कई देशों में साइकिल और अन्य सक्रिय यात्रा मोड में ‘विस्फोट’ हुआ. मिसाल के तौर प्र यूनाइटेड किंगडम में, 5% उपभोक्ताओं ने लॉकडाउन के दौरान एक बाइक (साइकिल) खरीदीं.

दुनिया भर में, सार्वजनिक स्थान के उपयोग की पुनः कल्पना करने के लिए शहर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं, साइकिल चलाने और चलने के लिए अधिक स्थान बना रहें हैं, ताकि पड़ोस को रहने लायक बना सकें और सामाजिक दूरी बनाए रखने में मदद कर सकें.

लंदन से रोम की दूरी के बराबर 2,082 किमी से अधिक साइकिल लेन की वैश्विक रूप से घोषणा की गई और / या जोड़ा गया. और 245 शहरों में 500 से अधिक उपक्रमों ने महामारी के दौरान गतिशीलता में सुधार का समर्थन करना शुरू कर दिया है.

स्वस्थ और हरित आर्थिक सुधार का समर्थन करने के माध्यम से, साइक्लिंग बुनियादी ढांचे का विस्तार कोविड युग के बाद की मांगों को पूरा करता है. एक्टिव मोबिलिटी से उत्सर्जन में कमी – यूरोपीय संघ में ए इस बदलाव के  परिणामस्वरूप अनुमानित रूप से 27 मिलियन टन CO2 इमिशन की कमी, या हर साल सात कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के उत्सर्जन में कमी आएगी.




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