क्या है इनविजिबल डिसएबिलिटी, इन्हें किन-किन चुनौतियों का करना पड़ता है सामना

By Socially Keeda on November 30, 2023
क्या है इनविजिबल डिसएबिलिटी, इन्हें किन-किन चुनौतियों का करना पड़ता है सामना
1 min read


लोगों में आमतौर पर कुछ बीमारियां (Diseases) होती हैं जिसका आसानी से पता चल जाता है और समय रहते उनका इलाज (Treatment) भी हो जाता है। क्या आपको पता है कि हमारे शरीर (Body) को कुछ ऐसी खतरनाक बीमारियां भी घेर लेती हैं जो अंदर ही अंदर पनपती रहती है और हमें उनका पता ही नहीं चल पाता है। ऐसी बीमारियों को ‘नजर न आने वाली बीमारी’ (Invisible Disabilities) कहते हैं। इनमें कई बीमारियां शामिल होती हैं जो शारीरिक और मानसिक तौर पर बड़ी समस्या और चुनौतियां पैदा करती हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में…

इनविजिबल डिसएबिलिटी के प्रकार

  • ऑटिज्म से ग्रस्त
  • ब्रेन इंजरी का शिकार होना
  • अत्यधिक थकावट विकार
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस
  • अत्यंत शारीरिक दर्द
  • ध्यान आभाव सक्रियता विकार
  • बायोपुलर डिसऑडर
  • डायबिटीज
  • एचआईवी/एड्स
  • मानसिक विकार
  • मिर्गी या स्ट्रॉक
  • नींद न आना
  • डिस्लेक्सिया
  • किसी भी काम करने पर दर्द होना
  • सीखने में कठिनाईं
  • डिसग्राफिया
  • बोलने में दिक्कत
  • जीर्ण दैहिक रोग
  • देखने और सुनने में दिक्कत

और भी पढ़ें: पेंडेमिक में अल्जाइमर पेशेंट की देखभाल कैसे करें?

इनविजिबल डिसएबिलिटी के कॉमन प्रकार

  • अत्यंत तनाव, घबराहट,
  • अत्यधिक पागलपन
  • डायबिटीज
  • मानसिक विकार
  • मिर्गी और स्ट्रॉक

लोगों संग समन्वय स्थापित न कर पाना जैसे कई सामान्य प्रकार हैं जो इनविजिबल डिसएबिलिटी से ग्रस्त लोगों में देखने को मिलते हैं।

इनविजिबल डिसएबिलिटी से ग्रस्त लोगों के सामने चुनौतियां

  • इन बीमारियों से ग्रस्त लोगों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं होती है कि आखिर उन्हें क्या समस्या हो रही है।
  • उन्हें इसके उपचार के बारे में भी कुछ पता नहीं होता है और न ही वे यह जानते हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए।
  • अगर उन्हें पता भी हो सकता है तो वे यह नहीं जानते कि उन्हें इस बीमारी को स्पष्ट रूप से कैसे बताना है।
  • वे इन बीमारियों को समझने में अकसर गलती भी कर बैठते हैं या उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं और उन पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझते हैं जो कि उनके स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत खतरनाक है।
  • हालांकि, उन्हें इस बात का अंदेशा हो जाता है कि वे किसी ने किसी बीमारी से ग्रस्त हैं लेकिन उसका पता नहीं लगा पातें और न ही फिर उसका उचित इलाज वे करवा पाते हैं।
  •  इसमें लोग शरीर में मौजूद बीमारी का पता लगाने की कोशिश तो करते हैं लेकिन सामने आए बिना किसी लक्षण के वे इसे पहचानने में असमर्थ रहते हैं।
  •  इन लोगों को वर्कप्लेस पर हिचक और संकोच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनमें बुराई और बेइज्जत होने का डर भी घर कर जाता है। यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब वे अपनी इनविजिबस डिसएबलिटी को अधिक महसूस करने लगते हैं।
  •  इन्हें वर्कप्लेस से भेदभाव का भी शिकार होना पड़ता है। सामान्य कर्मचारियों की तुलना में इनपर ज्यादा फोकस नहीं किया जाता है। अमूमन मामलों में इनकी कमजोरी सामने आने पर नौकरी से भी हाथ धोना पड़ जाता है।
  •  वहीं, नौकरी के लिए इंटरव्यू देते वक्त अपनी किसी इनविजिबल डिसएबिलिटी का खुलासा करना भी इन लोगों को भारी पड़ जाता है। क्योंकि, नियोक्ता ऐसे मामलों में इन लोगों से बचने की कोशिश करते हैं।
  • इस तरह की बीमारियां इन लोगों में आत्मविश्वास में कमी लाती है और इनमें हीन-भावना पैदा करती है। ऐसे लोग खुद के कलंकित होने पर टूट भी जाते हैं।
  • माइग्रेन से जूझ रहे इन लोगों में घर और कार्यालय में बढ़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हें अन्य कर्मारियों के मुकाबले कमजोर माना जाता है और इनके काम पर भी अंगुली उठाई जाती है। इस तरह की परेशानी इन लोगों के और दुविधा में डाल देती हैं।
  •  सबसे अहम बात दोस्त और पारिवारिक सदस्य भी इन लोगों की बीमारी पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं। वे इन्हें गंभीरता से नहीं देखते हैं। इन लोगों को पागल तक करार दिया जाता है जिससे इनका मानसिक संतुलन और बिगड़ने लगता है। जबकि लोगों को इसे इनकी मेडिकल कंडीशन समझने की जरुरत है।
  •  ऐसे लोग जब खुद को कलंकित महसूस करने लग जाते हैं तो इनमें भीषण तनाव घर कर जाता है। इनके हरकते और स्वभाव में नकारात्मक बदलाव आता है और यह लोग खुद को समाज से अलग कर अकेला रहना पसंद करने लगते हैं।
  •  मानसिक विकार वाले लोगों में सामाजिक रूप से इनमें तालमेल बिठाने और व्यवहारिक तौर पर चीजों का जल्दी से समझना मुश्किल होता है।

और भी पढ़ें:वर्ल्ड अल्जाइमर डे: अल्जाइमर और डिमेंशिया को लेकर कहीं आप भी तो नहीं है कंफ्यूज?

अमेरिका में इनविजिबल डिसएबलिटी के आंकड़े

लगभग 10 फीसदी अमेरिकी लोग ऐसे हैं जो इस मेडिकल कंडीशन के साथ जीते हैं. वहीं, 90 फीसदी लोग गंभीर मेडिकल कंडिशन में हैं जिन्हें उनकी बीमारी का पता नहीं है। इन लोगों के पास इसकी कोई जानकारी नहीं है और यह ऐसे जी रहे हैं जैसे उन्हें कोई बीमारी ही नहीं है, जबकि इनमें से 25 फीसदी लोगों में कुछ प्रकार की असीमित गतिविधियां होती हैं जो किसी में कम है तो किसी में गंभीर रूप से ये स्थिति देखी जा रही है। अमेरिका में इनविजिबल डिसएबिलिटी से ग्रस्त लोगों को डिसएबलिटी एक्ट के तहत सुरक्षा प्रदान की जाती है।

Page Contents

वहीं. बाकी बचे 75 फीसदी लोग अपनी क्रोनिक कंडीशन से प्रभावित नहीं हैं। गौरतलब है कि नजर न आने वाली यह बीमारियां उन लोगों के लिए वाकई में बड़ी चुनौती हैं जो इनसे ग्रस्त हैं। इतना ही नहीं दूसरों के लिए भी इन बीमारियों का पहचाना मुश्किल होता है और उनके लिए इसका कारण भी बताना आसान नहीं होता है। क्योंकि ऐसी बीमारियों में लक्षण जल्दी से उभरकर सामने नहीं आते हैं।

कॉलेज के छात्रों में न दिखाई देने वाली यह बीमारियां आम हैं। उदाहरण से समझिए, जैसे कि उनमें सीखने की क्षमता का अभाव, उन्हें हाइपर एक्टिव डिसऑडर होना। वहीं, इन छात्रों में दिल से संबंधित कई छिपी हुई बीमारियां होती हैं। इनके जल्दी थकने की भी शिकायत होती हैं

बीबीसी की खबर के मुताबिक, साल 2011 में कनाडा में हुए एक सर्वे के मुताबिक, न नजर आने वाली बीमारियों से पीड़ित 88 फीसदी लोग नकारात्मक विचारों से ग्रस्त हैं और वह अपनी समस्या पर खुलकर नहीं बोल पाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी शोध के मुताबिक,  डिसएबिलिटी से जूझ रहे 74 फीसदी लोग व्हीलचेयर का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

वहीं, सात साल पहले एचाईवी एड्स से ठीक हुए ब्रिटेन निवासी जिम्मी इसाक ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस बारे में खुलासा किया तो उनके काम के घंटे और वेतन कम कर दिया गया। वेतन कम होने की वजह से वह अपने घर का किराया नहीं चुका पाते थे। बता दें कि ब्रिटेन में एचआईवी से पीड़ित लोगों की बेरोजगारी दर राष्ट्रीय दर से तीन गुना अधिक है।

और भी पढ़ें: क्या बच्चों को अर्थराइटिस हो सकता है? जानिए इस बीमारी और इससे जुड़ी तमाम जानकारी

वर्कप्लेस पर भेदभाव से बचने के 4 तरीके

डिपार्टमेंट फॉर वर्क एंड पेंशन्स फैमिली रिसॉर्सेज सर्वे के अनुसार, ब्रिटेन में 21 फीसदी कामकाजी व्यस्क इनविजिबल डिसएबिलिटी से ग्रस्त हैं। इनमें सबसे ज्यादा ये लोग मानसिक विकारों और मेंटल हेल्थ से जूझ रहे हैं।

  •  नियोक्ताओं को ऑफिस में ऐसे लोगों के प्रति उदार रवैया अपनाने की जरुरत है। इनिविजिबल डिसएबलिटी लोगों को नजरअंदाज न किया जाए। यहां तक कि वर्कप्लेस में उनके देर से आने अनुचित व्यवहार और अनुपस्थिति में उन्हें ज्यादा टॉर्चर न किया जाए।
  • ऐसे लोगों की स्थिति जानने के बाद उन्हें ज्यादा से समझने की कोशिश करें और उन्हें कंफर्ट महसूस कराएं।
  • ऑफिस में इन पर ज्यादा बोझ न डाले। कंपनियों की नीतियों और मॉडल को इन्हें सावधानी पूर्वक समझाएं.
  • ऐसे कर्मचारियों के लिए उचित माहौल बनाएं। उनके साथ किया गया कोई भी भेदभाव गैर-कानूनी भी हो सकता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

संबंधित लेख:


Rate This Article

Click to rate

Socially Keeda
Socially Keeda
Content Director

Socially Keeda is the newsroom’s news assistant that brings you clarity in a world of fake news. We speak with journalists, readers and community voices to find practical insights about culture, finances, tech and life. Each post is designed to make it possible for you to learn something useful without hype from busy people making sure they still have time for other things in life and at work.

Ads loading...

- Advertisement - Continue Reading Below -

- Advertisement - Continue Reading Below -

Ads loading...