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गौतमबुद्ध नगर में 1.47 लाख रजिस्ट्री, मकान खरीद में बड़ा उछाल

लंबित परियोजनाएं सुलझीं, 1.47 लाख घरों की रजिस्ट्री

गौतमबुद्ध नगर में 1.47 लाख रजिस्ट्री, मकान खरीद में बड़ा उछाल

गौतमबुद्ध नगर में लंबे समय से अटकी आवासीय परियोजनाओं के समाधान का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। बीते वर्ष जिले में रिकॉर्ड संख्या में घरों की बिक्री और रजिस्ट्री दर्ज की गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 1.47 लाख रजिस्ट्रियां हुईं, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक हैं।

पिछले साल टूटा रिकॉर्ड

नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में मकान खरीदने वालों की संख्या में तेज बढ़ोतरी देखी गई। वर्ष 2024 में जहां करीब 1.44 लाख रजिस्ट्रियां हुई थीं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.47 लाख तक पहुंच गया।

राजस्व के मामले में भी सरकार को बड़ा फायदा हुआ है। वर्ष 2024 में लगभग 3338 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि 2025 में यह बढ़कर करीब 3646 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

रजिस्ट्रियों में उछाल का कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि रजिस्ट्रियों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण लंबे समय से अटकी परियोजनाओं का समाधान है। उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय विकास प्राधिकरणों ने कई नीतिगत कदम उठाए हैं। खासतौर पर ऐसी परियोजनाओं पर ध्यान दिया गया जो बिल्डरों की वित्तीय समस्याओं के कारण वर्षों से अधूरी पड़ी थीं।

अब खरीदारों को अपने फ्लैट का कब्जा मिलने लगा है। इससे लोगों का भरोसा बढ़ा है और वे निवेश के साथ-साथ रहने के उद्देश्य से भी संपत्ति खरीद रहे हैं। निर्माण कार्यों में तेजी और बेहतर कनेक्टिविटी ने भी खरीदारी को बढ़ावा दिया है।

लंबित रजिस्ट्रियों की समस्या

हालांकि अभी भी कुछ परियोजनाओं में रजिस्ट्रियां लंबित हैं। कई खरीदार विकास प्राधिकरण और बिल्डरों के बीच तालमेल की कमी के कारण परेशान हैं। कुछ मामलों में ‘जीरो डिफेक्ट’ या अन्य तकनीकी कारणों से रजिस्ट्रियां अटकी हुई हैं।

जब तक बिल्डर आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करते, तब तक रजिस्ट्रियों की अनुमति नहीं मिलती। इसके कारण खरीदारों को बैंक लोन, संपत्ति ट्रांसफर या अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

डिफॉल्टर परियोजनाओं का भविष्य

सरकार ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता के तहत कई फंसी हुई परियोजनाओं के समाधान की प्रक्रिया शुरू की है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के माध्यम से कुछ परियोजनाओं को नए डेवलपर्स को सौंपा गया है।

इससे उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में और अधिक परियोजनाएं पूरी होंगी और खरीदारों को राहत मिलेगी।

आगे क्या?

रियल एस्टेट बाजार में आई यह तेजी संकेत देती है कि यदि नीतिगत फैसले सही दिशा में लागू किए जाएं तो बाजार में विश्वास वापस लाया जा सकता है। गौतमबुद्ध नगर में बढ़ती रजिस्ट्रियां इसी विश्वास की कहानी कहती हैं।

आने वाले समय में यदि लंबित परियोजनाओं का समाधान तेजी से होता रहा, तो क्षेत्र में मकान खरीद की रफ्तार और भी तेज हो सकती है।

Frequently asked questions

1. गौतमबुद्ध नगर में कितनी रजिस्ट्रियां हुईं?
वर्ष 2025 में कुल 1.47 लाख संपत्ति रजिस्ट्रियां दर्ज की गईं।
2. रजिस्ट्रियों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण क्या है?
लंबे समय से अटकी हाउसिंग परियोजनाओं के समाधान और खरीदारों को कब्जा मिलने से बाजार में भरोसा बढ़ा।
3. सरकार को कितना राजस्व मिला?
2025 में करीब 3646 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
4. किन क्षेत्रों में ज्यादा बिक्री हुई?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मकान खरीद और रजिस्ट्रियों में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखी गई।
5. लंबित रजिस्ट्रियों की समस्या क्यों होती है?
बिल्डरों द्वारा शर्तें पूरी न करने या तकनीकी कारणों से विकास प्राधिकरण रजिस्ट्रियों की अनुमति नहीं देता, जिससे प्रक्रिया अटक जाती है।
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