EVENTS & FESTIVALS

Ekdant Sankashti Chaturthi 2021: कब है एकदंत संकष्टी चतुर्थी? जानें इसका महात्म्य, पूजा विधि एवं मुहूर्त!

Rate this post


Ekdant Sankashti Chaturthi 2021: कब है एकदंत संकष्टी चतुर्थी? जानें इसका महात्म्य, पूजा विधि एवं मुहूर्त!
- Advertisement-

Ekdant Sankashti Chaturthi 2021 (Picture Credit: Fb)

- Advertisement-

प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी ज्येष्ठ माह के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को एकदंत संकष्टी चतुर्थी (Ekdant Sankashti Chaturthi) का व्रत है, अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह एकदंत संकष्टी चतुर्थी 29 मई शनिवार के दिन पड़ रहा है. मान्यता है कि इस दिन श्रीगणेश भगवान की सच्ची आस्था एवं निष्ठा से व्रत-पूजा एवं चंद्रदर्शन कर अर्घ्य देनेवाले की हर मन्नत भगवान गणेश अवश्य पूरी करते हैं. आइए जानें इस व्रत का महात्म्य, पूजा-विधान, मुहूर्त एवं चंद्र-दर्शन का समय क्या है. यह भी पढ़ें: Vinayak Ganesh Chaturthi 2021: वैशाख विनायक गणेश चतुर्थी के व्रत से पूरी होती है हर मनोकामना, जानें पूजा विधि और रोचक कथा

एकदंत संकष्टी चतुर्थी का महात्म्य

संकष्‍टी चतुर्थी का अर्थ है संकट को हरने वाली चतुर्थी. इस दिन सभी दुखों को खत्म करने वाले गणेश जी का पूजन और व्रत किया जाता है. एकदन्त संकष्टी चतुर्थी के दिन शुभ और शुक्ल दो शुभ योग बन रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुभ और शुक्ल योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलती है. इस दिन गणेश भक्त सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए भगवान गणेश की पूजा करते हैं. मान्यता है कि गणेशजी की विधि-विधान से पूजा करने से बिगड़े काम बन जाते हैं, शुभ कार्य में आ रही बाधाएं मिट जाती हैं. निसंतान माएं इस दिन संतान प्राप्ति के लिए निर्जला व्रत भी रखती हैं.

- Advertisement-

पूजा मुहूर्त एवं चंद्र-दर्शन का समय

चतुर्थी प्रारंभः प्रातः 06.33 बजे से (29 मई शनिवार 2021)

- Advertisement-

चतुर्थी समाप्तः प्रातः 04.03 बजे (30 मई रविवार 2021)

संकष्टी के दिन चन्द्रोदय – 10:34 P.M. (29 मई शनिवार 2021)

व्रत एवं पूजा विधान

संकष्टी चतुर्थी को प्रातः सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. श्रीगणेश का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें. पूरे दिन उपवास रखते हुए सायंकाल घर के मंदिर के पास पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठे. एक स्वच्छ चौकी पर लाल आसन बिछाकर श्रीगणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. इन्हें गंगाजल से स्नान करवाकर धूप एवं दीप जलायें. अब गणेश गायत्री मंत्र ‘ॐ एक दंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो बुद्धि प्रचोदयात’ का जाप करते हुए श्रीगणेश का आह्वान करें. उन्हें रोली का तिलक लगाने के बाद दूब, अक्षत एवं लाल पुष्प अर्पित करें. प्रसाद में मोदक अथवा लड्डू फल चढ़ाएं. पूजा के दरम्यान ‘ॐ गणेशाय नमः या ॐ गं गणपते नमः’ का निरंतर जाप करें. तत्पश्चात व्रत कथा पढ़कर आरती उतारें. रात में चंद्रोदय होने पर चांद को जल अर्पित कर उनकी पूजा करें एवं गरीब अथवा ब्राह्मण को दान-दक्षिणा अर्पित कर व्रत का पारण करें.

 

- Advertisement-

//vdo (function(v,d,o,ai){ai=d.createElement('script');ai.defer=true;ai.async=true;ai.src=v.location.protocol+o;d.head.appendChild(ai);})(window, document, '//a.vdo.ai/core/latestly/vdo.ai.js');

//colombai try{ (function() { var cads = document.createElement("script"); cads.async = true; cads.type = "text/javascript"; cads.src = "https://static.clmbtech.com/ase/80185/3040/c1.js"; var node = document.getElementsByTagName("script")[0]; node.parentNode.insertBefore(cads, node); })(); }catch(e){}

} });


Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker
close button