सेक्स से जुड़े टॉप 12 मिथ्सः जानें हक़ीकत क्या है (Top 12 Sex Myths Busted)
सेक्स से जुड़े मिथक किसी पहेली से कम नहीं. कोई इन्हें सच कहता है, तो कोई सरासर झूठ. ऐसे में क्या है सच और क्या है मिथक?

मिथकः सेक्स फूड खाने से सेक्स का मूड बन जाता है.
सच्चाईः ऐसी बातें महज़ क़िताबों तक सीमित होती हैं, असल ज़िंदगी में लागू नहीं होतीं. हां, ये कहा जा सकता है कि रोज़ाना या नियमित रूप से सेक्स फूड, जैसे- अनार, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, गाजर, किशमिश, लहसुन आदि का सेवन सेक्स लाइफ को हेल्दी बनाता है, मगर सेक्स फूड के सेवन के तुरंत बाद सेक्स का मूड बन जाता है, ये स़िर्फ एक भ्रम है.
मिथकः पुरुषों की तरह महिलाएं सेक्स के बारे में कभी नहीं सोचतीं.
सच्चाईः हम ये कह सकते हैं कि पुरुषों के मुक़ाबले महिलाएं सेक्स के बारे में कम सोचती हैं, मगर ये कतई नहीं कह सकते कि महिलाएं सेक्स के विषय में सोचती ही नहीं हैं. रिसर्च की मानें तो न स़िर्फ पुरुष, बल्कि महिलाएं भी सेक्स के बारे में सोचती हैं, लेकिन ऐसा उस वक़्त होता है, जब वो हार्मोनल बदलाव के दौर से गुज़रती हैं.
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मिथकः महिलाएं पॉर्न मूवी देखना पसंद नहीं करतीं.
सच्चाईः पॉर्न मूवी के नाम पर भले ही हमेशा से पुरुषों को बदनाम किया जाता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि महिलाएं पॉर्न मूवी देखना पसंद नहीं करतीं. ये बात सर्वे से भी साबित हो चुकी है कि पुरुषों की तरह महिलाएं भी पॉर्न मूवी देखना पसंद करती हैं. हां, पुरुषों की तरह महिलाएं इस बात को स्वीकार नहीं करतीं, इसलिए लोग इस ग़लतफ़हमी में रहते हैं कि महिलाएं पॉर्न मूवी देखना पसंद नहीं करतीं.
मिथकः सेक्स के दौरान महिला पार्टनर अगर सुखद आवाज़ें न निकाले, तो इसका मतलब वो सेक्स क्रिया को एंजॉय नहीं कर रही.

सच्चाईः ये बात शत-प्रतिशत झूठ है. सेक्स के दौरान, ख़ासकर
ऑर्गेज़्म के वक़्त कुछ महिलाएं सुखद आवाज़ें निकालती हैं, मगर ये ज़रूरी नहीं कि सारी महिलाएं ऐसा ही करें. अगर वो ऐसा नहीं करतीं, तो वो सेक्स क्रिया को एंजॉय नहीं कर रही हैं, ऐसा नहीं है. विशेषज्ञों की मानें तो हर कोई अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करे, ये ज़रूरी नहीं, कई महिलाएं चुप रहकर ही सेक्स क्रिया का आनंद लेती हैं.
मिथकः सेक्स पोजीशन में बदलाव महिलाओं को प्रेग्नेंट होने से बचाता है.
सच्चाईः कई लोग इस बात को सच मानते हैं, लेकिन ये सरासर ग़लत है. प्रेग्नेंसी का संबंध स्पर्म से होता है न कि सेक्स की किसी ख़ास पोजीशन से. कोई भी महिला तभी प्रेग्नेंट होती है, जब वो पुरुष स्पर्म के संपर्क में आती है. ऐसे में सेक्स पोज़ीशन कैसी थी, कैसी नहीं, प्रेग्नेंसी के लिए ये बात मायने नहीं रखती.
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मिथकः सुरक्षित सेक्स के लिए दो कॉन्डम का इस्तेमाल बेहतरीन विकल्प है.
सच्चाईः सेक्स के दौरान कॉन्डम फटने की वजह से लोग ऐसा सोचते हैं, लेकिन ये सच नहीं है. दो कॉन्डम का इस्तेमाल करने से इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि कॉन्डम को क्षति नहीं पहुंचेगी. हो सकता है, दो कॉन्डम इस्तेमाल करने पर भी वो फट जाएं.
मिथकः सेक्स के बाद अगर महिला प्रेग्नेंट होती है, तो प्रेग्नेंसी के लक्षण तुरंत दिखाई देते हैं.
सच्चाईः इस बात में ज़रा भी सच्चाई नहीं है. सेक्स के तुरंत बाद तो क्या, कई बार कई महीने बीत जाने पर भी प्रेग्नेंसी के लक्षण नहीं दिखते, जबकि कुछ मामलों में एक महीने के अंदर महिलाओं में ये लक्षण दिखने लगते हैं. विशेषज्ञों की मानें, तो ये बात महिलाओं के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है.
मिथकः सेक्स पुरुष प्रधान क्रिया है.
सच्चाईः ये सोच सरासर ग़लत है कि सेक्स पुरुष प्रधान क्रिया है. सेक्स की न स़िर्फ इच्छा, बल्कि ज़रूरत भी स्त्री-पुरुष दोनों को होती है. हां, ये बात और है कि पुरुष अपनी इच्छा ज़ाहिर कर देते हैं, मगर महिलाएं कभी संकोचवश, तो कभी शर्म के मारे सेक्स की पहल नहीं करतीं, लेकिन सेक्स में उनकी रुचि नहीं होती, ऐसा नहीं कह सकते.
मिथकः ड्रिंक करके सेक्स करने से सेक्स का मज़ा दुगुना हो जाता है.
सच्चाईः ड्रिंक करने (शराब पीने) के बाद सेक्स करने से सेक्स का मज़ा बढ़ जाता है, ये बात भी ग़लत है. दरअसल, ड्रिंक से सेक्स का कोई संबंध नहीं होता, बल्कि कई बार शराब का सेवन सेक्स के अनुभव से आपको वंचित कर देता है, तो कई बार शराब पीने से सेक्स का सारा मज़ा किरकिरा हो जाता है.
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मिथकः महिलाएं फैंटेसी सेक्स में शामिल नहीं होतीं.
सच्चाईः अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आप ग़लत हैं. सर्वे के अनुसार, पुरुष जिस तरह सेक्स क्रिया के दौरान फैंटेसी की दुनिया में खो जाते हैं, उसी तरह महिलाएं भी फैंटेसी की दुनिया में जाकर सेक्स क्रिया को एंजॉय करती हैं. हां, ये कहा जा सकता है कि इस मामले में पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है.
मिथकः अच्छे फिगर वाली महिलाएं बेहतर सेक्स पार्टनर साबित होती हैं.
सच्चाईः पुरुषों में ख़ासकर ये ग़लत धारणा होती है कि अच्छे फिगर वाली महिलाएं बेहतर सेक्स पार्टनर साबित होती हैं, लेकिन ये ज़रूरी नहीं है. सर्वे के ज़रिए कई पुरुषों ने इस बात को साबित कर दिया है कि सेक्स क्रिया के दौरान उनका ध्यान पार्टनर के फिगर पर नहीं, बल्कि सेक्स क्रिया पर होता है.
मिथकः अगर पहली बार आप सेक्स में असफल हो जाते हैं, तो इसका मतलब आप में कमी है.
सच्चाईः ये एक ग़लत धारणा है. जिस तरह हर चीज़ की प्रैक्टिस ज़रूरी होती है, उसी तरह बेहतर सेक्स का आनंद भी कई बार प्रैक्टिस करने के बाद मिलता है. हो सकता है, शुरुआती दौर में आप सेक्स को उस तरह एंजॉय न कर पाएं, जिस तरह कई बार प्रैक्टिस के बाद.
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