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मानसिक स्वास्थ्य का सेक्स लाइफ पर असर (How Mental Health Affects Your Sex Life?)

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मानसिक स्वास्थ्य का सेक्स लाइफ पर असर (How Psychological Well being Impacts Your Intercourse Life?)

भागदौड़ और व्यस्तता भरी ज़िंदगी में वैवाहिक दंपतियों की सेक्स लाइफ (Intercourse Life) में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है. ऐसे में कई बार पति-पत्नी के अंतरंग रिश्तों में रोमांस की जगह बोरियत पैदा हो जाती है. अगर पति या पत्नी में से कोई एक दिमाग़ी तौर पर तनावग्रस्त होता है तो उसका सीधा असर उनके बेडरूम में दिखाई देता है, जहां पति-पत्नी के मन में सेक्स के लिए पैशन व प्लेज़र की जगह बोरियत और नीरसता के भाव जागने लगते हैं. अधिकांश लोगों ने यह अनुभव भी किया होगा कि जब वो टेंशन फ्री होते हैं तब सेक्स को ज़्यादा एन्जॉय करते हैं, लेकिन जब वो किसी तरह की मानसिक परेशानी में होते हैं तो इसका दुष्प्रभाव उनकी सेक्स लाइफ पर भी दिखाई देता है. आख़िर मानसिक स्वास्थ्य और सेक्स लाइफ के बीच क्या कनेक्शन है? चलिए जानते हैं.

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दिमाग़ का सेक्स से कनेक्शन

सेक्स का दिमाग़ से सीधा कनेक्शन है, क्योंकि जब हम सेक्स के बारे में सोचते हैं तब हमारा दिमाग़ मूड बनाने वाले हार्मोन सेरोटोनिन का स्राव करता है. इस हार्मोन के स्राव से हमारे यौन अंगों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है, लेकिन जब कोई मानसिक तौर पर अस्वस्थ या परेशान होता है या फिर दवाइयों का सेवन कर रहा है तो इसका सीधा असर उसकी सेक्स लाइफ पर दिखाई देता है. ऐसे में व्यक्ति को सेक्सुअल डिसफंक्शन या कामेच्छा में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए हेल्दी सेक्स लाइफ के लिए स़िर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक तौर पर भी स्वस्थ रहना बेहद आवश्यक है.

1- पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर

कई अध्ययनों में यह ख़ुलासा किया गया है कि जो महिला या पुरुष पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के शिकार होते हैं उनकी सेक्स लाइफ बुरी तरह से प्रभावित होती है. इससे पीड़ित लोगों को अपने अंतरंग रिश्तों में काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. हालांकि यह ट्रॉमा बीते समय में हुए यौन हिंसा या किसी गंभीर दुर्घटना के कारण भी हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पीड़ित व्यक्ति यौन क्रिया के दौरान उत्तेजना की कमी महसूस करता है और सेक्स में उसकी सक्रियता नहीं रहती है.

2- डिप्रेशन

डिप्रेशन यानी अवसाद से पीड़ित लोग अक्सर शारीरिक ऊर्जा की कमी महसूस करते हैं, जिसके कारण सेक्स में उनकी रुचि कम होने लगती है या फिर उनकी कामेच्छा में कमी आ जाती है. ऐसे लोग सेक्सुअल डिसफंक्शन के शिकार हो जाते हैं, जिसके चलते उनमें इरेक्शन या ऑर्गेज्म की कमी जैसी समस्याएं हो जाती हैं. कई मामलों में एंटीडिप्रेसेंट दवाइयों के सेवन से भी सेक्स लाइफ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता दिखाई देता है.

3- एंज़ायटी

कई अध्ययनों से यह पता चला है कि एंज़ायटी से पीड़ित क़रीब 75 फ़ीसदी लोगों में यौन समस्याएं होती हैं. इससे पीड़ित पुरुषों में जहां इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या देखी जाती है, वहीं महिलाओं में सेक्सुअल अवर्शन डिसऑर्डर हो सकता है, जिसमें सेक्स से डर और उससे बचने जैसी चीज़ें शामिल हैं. यह समस्या उन लोगों को भी हो सकती है जिनके साथ यौन शोषण हुआ हो, इसके अलावा सोशल एंज़ायटी से पीड़ित लोगों की कामेच्छा में भी कमी आ सकती है.

4- ईटिंग डिसऑर्डर

जब कोई व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में या बहुत कम मात्रा में खाना शुरू कर देता है तो इसे ईटिंग डिसऑर्डर कहा जाता है. यह एक तरह की मानसिक बीमारी है. इस डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों में सेक्सुअल एंज़ायटी, सेक्स से बचना, सेक्स के प्रति उदासीनता और सेक्सुअल डिसफंक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. एक रिसर्च के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति ईटिंग डिसऑर्डर का शिकार है तो इससे उसके शरीर में कामोत्तेजना बढ़ाने वाले हार्मोन्स का उत्पादन सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है.

5- बाइपोलर डिसऑर्डर

बाइपोलर डिसऑर्डर एक ऐसा मानसिक विकार है जिसमें पीड़ित व्यक्ति का मूड बार-बार बदलता है. कभी उसका आत्मविश्‍वास चरम पर होता है तो कभी उसका आत्मविश्‍वास एकदम निचले स्तर पर चला जाता है. इससे पीड़ित व्यक्ति एक पल ख़ुश तो अगले ही पल दुखी और अवसादग्रस्त हो जाता है, जिसके चलते उसकी सेक्सुअल लाइफ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. ऐसे में उनका बार-बार बदलता मूड और व्यवहार अंतरंग रिश्तों के लिए घातक बन जाता है.

6- बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर

अनुचित या अत्यधिक भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देना, अत्यधिक आवेगपूर्ण व्यवहार करना और अस्थिर संबंधों का इतिहास इत्यादि बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के लक्षण हो सकते हैं. इससे पीड़ित लोग न तो नौकरी में स्थिर रह पाते हैं और न ही अपने निजी रिश्तों में. यही वजह है कि इनकी सेक्सुअल लाइफ बदतर होती है, क्योंकि इससे पीड़ित व्यक्ति या तो सेक्स से बचने की कोशिश करता है या फिर वो सेक्स के दौरान अत्यधिक आवेग में आ जाता है.

7- स्किज़ोफ्रेनिया

आंकड़ों के मुताबिक़, भारत में विभिन्न डिग्री के स्किज़ोफ्रेनिया से लगभग 40 लाख लोग पीड़ित हैं. यह बीमारी एक हज़ार वयस्कों में से क़रीब 10 लोगों को अपना शिकार बनाती है और यह सबसे ज़्यादा 16 से 45 वर्ष की आयु के लोगों को प्रभावित करती है. रोग की गंभीरता के आधार पर इससे पीड़ित व्यक्ति की सेक्स क्षमता कम या सीमित हो सकती है, जिसके चलते इरेक्शन सही तरी़के से नहीं हो पाता है और ऑर्गेज्म पाने की क्रिया बिगड़ सकती है.

8- ऑब्सेसिव कंप्लसिव डिसऑर्डर (ओसीडी)

ओसीडी से पीड़ित व्यक्ति एक ही चीज़ को बार-बार करता है, जैसे- बार-बार हाथ धोना, दरवाज़े का लॉक चेक करना, साफ़-सफ़ाई पर ज़्यादा ध्यान देना इत्यादि. ऑब्सेसिव कंप्लसिव डिसऑर्डर का असर पीड़ित व्यक्ति की सेक्स लाइफ पर भी पड़ता है. इससे पीड़ित व्यक्ति अति कामुक, यौन कल्पना यानी सेक्सुअल फेंटसी और मास्टरबेशन का आदी हो सकता है. हालांकि इसके लक्षणों को कम करने के लिए उपचार और दवाइयों की मदद ली जा सकती है.

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क्या करें?

अगर किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या के कारण आपकी सेक्स लाइफ बाधित हो रही है तो इलाज के अलावा आपको कुछ और बातों का भी ध्यान रखना चाहिए.

दवाइयों में बदलाव- आप जिस मनोरोग विशेषज्ञ से अपना इलाज करा रहे हैं उससे अपनी सेक्स लाइफ पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव के बारे में खुलकर बात करें और उससे दवाइयों में कुछ बदलाव करने की अपील करें, ताकि आपकी सेक्स लाइफ पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकें.

पार्टनर से कुछ न छुपाएं- अगर आप किसी मानसिक परेशानी से गुज़र रहे हैं तो इस बारे में अपने पार्टनर से खुलकर बात करें. उससे अपनी मानसिक स्थिति और सेक्स लाइफ में आ रही परेशानियों के बारे में बात करें. इससे पार्टनर आपकी मन:स्थिति को अच्छी तरह से समझेगा और आपके रिश्ते में मज़बूती बनी रहेगी.

थेरेपिस्ट की मदद लें- हो सकता है कि इलाज के दौरान थेरेपिस्ट या विशेषज्ञ आपकी सेक्स लाइफ के बारे में न पूछें, ऐसे में आपकी मानसिक स्थिति के कारण आपकी सेक्स लाइफ किस तरह से बाधित हो रही है इसके बारे में उन्हें आपको ख़ुद बताना होगा. इसलिए अपनी हिम्मत बढ़ाएं और थेरेपिस्ट के साथ-साथ अपने पार्टनर को भी इस समस्या के बारे में बताएं.

ये चीज़ें भी हैं ज़रूरी- मानसिक बीमारी के कारण सेक्स लाइफ पर पड़ रहे दुष्प्रभाव के बारे में हरदम सोचने की बजाय अपने पार्टनर से खुलकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीखें, पार्टनर के साथ हंसी-मज़ाक करें, अपनी जीवनशैली में शामिल अन्य अच्छी चीज़ों पर भी ध्यान दें. इससे पार्टनर के साथ आपका भावनात्मक रिश्ता मज़बूत होगा और आपके अंतरंग रिश्तों में भी सुधार आने लगेगा.

– अनिता राम

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