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महिलाओं को सिर्फ काम नहीं बल्कि स्वास्थ्य पर भी देना चाहिए ध्यान, ये टिप्स आ सकते हैं काम

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महिलाएं शारीरिक और मानसिक रूप से पुरुषों से अलग होती हैं। महिलाओं और पुरुषों की शारीरिक और मानसिक क्षमता के बारे में आपने बहुत-सी बातें सुनी होंगी। पुरुष महिलाओं की अपेक्षा अधिक मस्कुलर होते हैं। पुरुष महिलाओं की अपेक्षा तेज भाग सकते हैं, अधिक वजन उठा सकते हैं और साथ ही महिलाओं की अपेक्षा शारीरिक क्षमता वाले काम भी ज्यादा कर सकते हैं। लेकिन मेडिकल टर्म में मामला उल्टा हो जाता है। जी हां! मेडिकल टर्म में पुरुष महिलाओं की अपेक्षा कमजोर होते हैं। हम जानते हैं कि आपको ये बात पढ़कर हैरानी हो रही होगी लेकिन ये सच है। पुरुष महिलाओं की तुलना में कम जीवन जी पाते हैं। महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा अपने जीवनकाल में कम बीमार पड़ती हैं। अगर ये कहा जाए कि महिलाओं का स्वास्थ्य पुरुषों की अपेक्षा अच्छा होता है, तो ये गलत नहीं होगा।

अब हम आपको दूसरी सच्चाई से भी रूबरू करवाते हैं। महिलाएं स्वास्थ्य की अपेक्षा अपने काम को ज्यादा तवज्जों देती हैं। घर और ऑफिस के कामों के बीच महिलाएं अपने स्वास्थ्य को पूरी तरह से इग्नोर कर देती हैं। इस कारण उन्हें बीमारियों की जानकारी भी अचानक से होती है। अगर महिलाओं का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, तो आने वाली जनरेशन का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। स्वस्थ्य मां स्वस्थ्य बच्चे को जन्म देती है। महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत से हॉर्मोनल चेंजेस होते हैं। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं स्वास्थ्य पर ध्यान न दें, तो उन्हें भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधि किन बातों का ख्याल रखना चाहिए, आइए इस बारे में भी जानें।

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 सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए महिलाओं को किन बातों का ख्याल रखने की जरूरत है?

महिलाओं के सम्पूर्ण स्वास्थ्य से आशय उनकी फिजकल और मेन्टल हेल्थ से है। सम्पूर्ण स्वास्थ्य की देखरेख के लिए जरूरी है कि अच्छी आदतों को अपनाया जाए। हेल्दी हैबिट्स हेल्दी लाइफ का मंत्र है। यहां हम आपको कुछ पॉइंट में जानकारी देंगे, अगर आप उससे सहमत हैं, तो आप शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य हैं।

  • आप खाना तब खाती हैं, जब आपको भूख लगती है। पेट भर जाने के बाद आप खाना नहीं खाती हैं।
  • खाने में आप हमेशा एक जैसा भोजन नहीं खाती हैं। डायवर्स डायट(diverse diet) आपको पसंद है।
  • आप ज्यादा बीमार नहीं पड़ती हैं।
  • बेड में जाने के बाद आपको तुरंत नींद आ जाती है।
  • आप रोजाना सात से नौ घंटे की नींद लेती हैं।
  • आप मन में आई बातों को अपनों से शेयर करना पसंद करती हैं।
  • आप टेंशन लेती हैं लेकिन समस्या का हल भी निकाल लेती हैं।
  • आप इमोशनल हैं लेकिन भावनाओं को कभी खुद पर हावी नहीं होने देती हैं।

अगर आप उपरोक्त दी गई बातों से सहमत है, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। दी गई बातें हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ बदलाव आपको हेल्दी बनाने का काम कर सकते हैं। पौष्टिक आहार का सेवन, अच्छी नींद लेना, रोजाना एक्सरसाइज करना, काम को खुद पर हावी न होने देना आदि अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।

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कौन-कौन सी तकलीफें महिलाओं को आम तौर पर हो सकती हैं?

महिलाओं को कई तरह की बीमारियों का खतरा रहता है। जब शरीर का कोई अंग सुचारू रूप से काम नहीं करता है या फिर हॉर्मोन कम या फिर ज्यादा मात्रा में बनने लगता है, तो बीमारियां पैदा होने लगती हैं। महिलाओं के शरीर में मुख्य रूप से निम्नलिखित बीमारियां हो सकती हैं।

  • दिल की बीमारी (Heart Disease)
  • स्तन कैंसर (Breast Cancer)
  • ओवेरियन और सर्वाइकल कैंसर ( Ovarian and Cervical Cancer)
  • गाइनेकोलॉजिकल हेल्थ इशू जैसे कि PCOS, वजायनल यीस्ट इन्फेक्शन
  • प्रेग्नेंसी इशू ( Pregnancy Issues)
  • ऑटोइम्यून डिजीज ( Autoimmune Diseases)
  • डिप्रेशन ( Depression)
  • थायरॉयड

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic ovary syndrome )

Polycystic ovary syndrome

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस महिलाओं की रिप्रोडक्टिव एज में होने वाली आम बीमारी है। हॉर्मोन डिसऑर्डर के कारण महिलाओं को पीसीओएस की समस्या हो जाती है। पीसीओएस की समस्या के कारण महिलाओं के पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। चेहरे या शरीर पर अत्यधिक बाल उगने लगते हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कारण महिलाओं के शरीर में मेल हॉर्मोन एंड्रोजन(androgen) अधिक मात्रा में बनने लगता है। ओवरी छोटे फॉलिकल्स बनाना शुरू कर देती है, जिसमे तरल पदार्थ भरा होता है। इस कारण से अनियमित एग रिलीज होते हैं। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का सही समय पर ट्रीटमेंट न कराने पर टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं में होने वाली इस बीमारी का कारण सही तौर पर ज्ञात नहीं है। ये बीमारी जेनेटिक यानी अनुवांशिक भी हो सकती है। शरीर में अधिक मात्रा में इंसुलिन बनने के कारण भी पीसीओएस की समस्या हो सकती है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लक्षण

  • हेयर वीक होना
  • अचानक से वजन बढ़ना
  • अचानक से शरीर में बालों की ग्रोथ
  • चेहरे में पिंपल आना
  • कंसीव करने में समस्या
  • डिप्रेशन की समस्या
  • टाइप 2 डायबिटीज
  • हार्ट डिजीज
  • पीरियड्स का सही समय पर न होना

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वजायनल यीस्ट इन्फेक्शन ( Yeast Infection)

वजायनल यीस्ट इन्फेक्शन फंगल इन्फेक्शन है। महिलाओं को यीस्ट इन्फेक्शन के कारण खुजली की समस्या, डिस्चार्ज की समस्या, योनी में जलन की समस्या हो जाती है। इसे वजायनल कैंडिडिआसिस (vaginal candidiasis) भी कहा जाता है। यीस्ट इन्फेक्शन की समस्या से चार में तीन महिलाएं अवश्य प्रभावित होती हैं। यीस्ट इन्फेक्शन सेक्शु्अली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन नहीं है। ओरल सेक्स के दौरान इस इन्फेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। कैनडीडा अल्बिकन्स (Candida albicans ) के कारण महिलाओं में यीस्ट इन्फेक्शन होता है। यीस्ट इन्फेक्शन होने पर निम्नलिखित लक्षण दिख सकते हैं।

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गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterine fibroids)

गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterine fibroids) यूट्रस में होने वाली नॉन कैंसर ग्रोथ है। यूट्रस में होने वाली नॉन कैंसर ग्रोथ कंसीव करने से समस्या पैदा कर सकती है। अगर महिला को प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भाशय फाइब्रॉएड की समस्या हो जाती है, तो प्रेग्नेंसी में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। अगर फाइब्रॉएड का साइज छोटा है, तो प्रेग्नेंसी के दौरान खास समस्या नहीं होती है। फाइब्रॉएड का साइज बड़ा होने पर एब्रियो के डेवलपमेंट में समस्या होती है। कुछ महिलाओं को गर्भाशय फाइब्रॉएड की जानकारी नहीं हो पाती है क्योंकि इस बीमारी के लक्षण सामान्य तौर पर नजर नहीं आते हैं। जानिए गर्भाशय फाइब्रॉएड के लक्षणों के बारे में।

  • हैवी ब्लीडिंग
  • एक सप्ताह से ज्यादा पीरियड्स
  • पेल्विक प्रेशर या पेन
  • फ्रीक्वेंट यूरिनेशन
  • कब्ज की समस्या
  • पैरों में दर्द

बैक्टीरियल वजिनोसिस (Bacterial vaginosis)

बैक्टीरियल वजिनोसिस वजायनल इन्फेक्शन है। जब योनी में बैक्टीरिया का संक्रमण हो जाता है तो महिलाओं को वजायना में खुजली, जलन आदि का एहसास होता है। ये इन्फेक्शन सेक्शु्अली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन नहीं है। वैसे तो, ये संक्रमण महिलाओं को किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन सेक्स के शुरुआती दिनों में महिलाओं को बैक्टीरियल वजिनोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है।बैक्टीरियल वेजिनोसिस किन कारणों से होता है, इस बारे में जानकारी नहीं है लेकिन अनप्रोटेक्टेड सेक्स इस समस्या का कारण बन सकता है। बैक्टीरियल वजायनल इन्फेक्शन होने पर निम्न लक्षण दिख सकते हैं।

  • सफेद या हल्के हरे रंग का डिस्चार्ज
  • योनी से गंध आना
  • योनि में खुजली
  • यूरिन के दौरान जलन होना

यूरिन करते समय या फिर सेक्स करते समय अगर आपको दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।

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पेल्विक रिलेटेड इश्यू  ( Pelvic related issue)

पेल्विक इंफ्लमेटरी डिजीज महिलाओं के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन का इन्फेक्शन है। जब सेक्शु्अली ट्रांसमिटेड बैक्टीरिया वजायना से यूट्रस, फेलोपियन ट्यूब या ओवरी में पहुंचता है, तो खतरा अधिक बढ़ जाता है। पेल्विक इंफ्लमेटरी डिजीज होने पर महिलाओं को जानकारी नहीं मिलती है क्योंकि इस बीमारी के लक्षण साफ तौर पर नहीं दिखते हैं। कंसीव करने में समस्या या फिर क्रॉनिक पेल्विक पेन होने पर इस डिजीज के बारे में पता चलता है। कुछ महिलाएं पेल्विक इंफ्लमेटरी डिजीज के लक्षण महसूस कर सकती हैं। जानिए पेल्विक इंफ्लमेटरी डिजीज के लक्षण क्या है ?

  • पेट के निचले हिस्से में दर्द होना
  • एब्नॉर्मल हैवी वजायनल डिस्चार्ज
  • वजायना से बदबू आना
  • इंटरकोर्स के बाद ब्लीडिंग
  • पीरियड्स के बाद ब्लीडिंग होना
  • फीवर होना
  • फ्रीक्वेंट यूरिनेशन

उपरोक्त लक्षण यदि आपको नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर पहले जांच करेंगे और फिर आपको कुछ दवाओं का सेवन करने की सलाह देंगे।

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थायरॉइड डिजीज ( Thyroid Disease)

महिलाओं में होने वाली बीमारियों में थायरॉइड की बीमारी आम है। थायरॉइड ग्रन्थि में गड़बड़ी हॉर्मोन असंतुलन का कारण बन सकती है। गले के बीच उपस्थित  थायरॉइड ग्लैंड से  थायरॉइड हॉर्मोन बनता है। थायरॉइड हॉर्मोन के ज्यादा बनने पर हायपरथायरॉइडिज्म की समस्या हो जाती है। वहीं, थायरॉइड हॉर्मोन के कम बनने पर हायपोथायरॉइड की समस्या हो जाती है। दोनों ही स्थितियों कुछ अलग लक्षण नजर आ सकते हैं।

 हायपोथायरॉइड के लक्षण

  • वजन बढ़ जाना
  • नींद न आना
  • कमजोरी का एहसास
  • प्यास ज्यादा लगना
  • कब्ज की समस्या
  • पीरियड्स अनियमित होना
  • इम्यूनिटी कम होना

हायपरथायरॉइडिज्म के लक्षण

  • वजन कम होना
  • थकान का एहसास
  • मूड चेंज होना
  • घबराहट का एहसास
  • हार्ट बीट बढ़ना

महिलाओं में स्ट्रेस के कारण, डिलिवरी के बाद हॉर्मोन में बदलाव आने के कारण थायरॉइड की समस्या हो जाती है।

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मेनोपॉज (Menopause)

जब महिलाओं के पीरियड्स बंद हो जाते हैं, तो उसे मेनोपॉज के नाम से जाना जाता है। मेनोपॉज के बाद महिलाएं मां नहीं बन सकती हैं। मेनोपॉज हॉर्मोनल चेंज का परिणाम है, जो महिलाओं में शारीरिक और मानसिक बदलाव लाता है। महिलाओं में 45 से 50 साल की एज में मेनोपॉज की प्रोसेस होती है। जानिए महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षण के बारे में।

  • पीरियड्स का अनियमित होना
  • स्वभाव में बदलाव
  • चिड़चिड़ापन
  • थकान का एहसास
  • सिरदर्द की समस्या
  • नींद न आने की समस्या
  • वजाइना में सूखापन

इन तकलीफों से कैसे निजात पाया जा सकता है?

आपने महिलाओं में होने वाली मुख्य बीमारियों के बारे में तो जानकारी ले ली है। अब हम आपको बताएंगे कि कैसे आप इन समस्याओं से बच सकती हैं। जानिए पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से बचाव करने के लिए क्या सवाधानी रखनी चाहिए ?

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम से बचाव के लिए करें ये उपाय

जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि पीसीओएस की बीमारी हॉर्मोन में आए बदलाव के कारण होती है। ऐसा अनुवांशिक कारण, किसी मेडिकल ट्रीटमेंट के कारण हॉर्मोन में हुए चेंजेस के कारण हो सकता है। पीसीओएस की समस्या के कारण महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या, डिप्रेशन की समस्या, डायबिटीज की समस्या आदि देखने को मिलते हैं। डॉक्टर इस बीमारी की जांच के लिए कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकता है। साथ ही बीमारी के कारण उत्पन्न हुए लक्षणों को खत्म करने के लिए डॉक्टर दवाइयों का सेवन करने की सलाह देंगे। आपको ट्रीटमेंट के साथ ही इन बातों पर भी ध्यान देना चाहिए।

  • पीसीओएस की समस्या के कारण वजन तेजी से बढ़ता है। ऐसे में आपको रोजाना एक्सरसाइज करनी चाहिए।
  • खाने में हल्दी फूड को शामिल करें। हेल्दी फूड वजन को मेंटेन रखने में मदद करता है।
  • पीसीओएस से पीड़ित महिला को स्मोकिंग और एल्कोहॉल से दूर रहना चाहिए।
  • लाइफस्टाइल में किए गए कुछ बदलाव और दवाओं का सेवन आपको इस बीमारी से छुटकारा दिला सकता है।

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वजायनल यीस्ट इन्फेक्शन ( Yeast Infection) से बचाव

जो महिलाएं एंटीबायोटिक का सेवन करती हैं, उनमे यीस्ट इन्फेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। जिन महिलाओं में एस्ट्रोजन का लेवल हाई होता है, उनमे भी यीस्ट इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान, हाई डोज एस्ट्रोजन बर्थ पिल्स लेने के कारण, एस्ट्रोजन हॉर्मोन थेरिपी के कारण महिलाओं में यीस्ट इन्फेक्शन का रिस्क अधिक रहता है। महिलाओं को यीस्ट इन्फेक्शन से बचने के लिए हाइजीन का ख्याल रखना चाहिए। डॉक्टर यीस्ट इन्फेक्शन को खत्म करने के लिए आपको दवाओं का सेवन करने की सलाह देगा। आपको मेडिसिन्स लेने के साथ ही इन बातों पर ध्यान देना चाहिए।

  • टाइट फिटिंग कपड़े न पहनें।
  • अनावश्यक एंटीबायोटिक का यूज न करें।
  • अधिक गर्म पानी में नहाने से बचें।
  • गीले कपड़ों को न पहनें। गीलेपन के कारण इन्फेक्शन का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
  • वजायना या योनी में खुजली, जलन होने पर डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

अगर आप उपरोक्त बातों पर ध्यान देंगी, तो वजायनल यीस्ट इन्फेक्शन से बच सकती हैं। आप इस विषय में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श भी कर सकती हैं।

गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterine fibroids) से बचाव

गर्भाशय फाइब्रॉएड कई कारणों से हो सकते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन हॉर्मोन यूटेराइन लाइनिंग के डेवलपमेंट को स्टिमुलेट करने का काम करते हैं। इस कारण से फाइब्रॉएड बनने लगते हैं। इंसुलिन ग्रोथ फैक्टर भी फाइब्रॉएड की ग्रोथ को बढ़ाने का काम करता है। एक्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स भी गर्भाशय फाइब्रॉएड को बढ़ाने का काम करते हैं। गर्भाशय फाइब्रॉएड से बचाव संभव नहीं है। बड़े साइज के गर्भाशय फाइब्रॉएड का ट्रीटमेंट किया जाता है। अगर महिलाएं हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं और खाने में फूट्रस, वेजीटेबल्स शामिल करें, तो फाइब्रॉएड रिस्क को कम किया जा सकता है। इस बारे में आप अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श करें।

बैक्टीरियल वेजिनोसिस (Bacterial vaginosis) से बचाव

जिन महिलाओं के मल्टिपल सेक्स पार्टनर होते हैं, उन्हें बैक्टीरियल वजायनल इन्फेक्शन होने का खतरा अधिक होता है। वजायना को बार-बार धोने से क्लीजिंग एजेंट वजायना के नैचुरल बैलेंस को बिगाड़ने का काम करते हैं। इस कारण से एनएरोबिक बैक्टीरिया (anaerobic bacteria) ग्रोथ आसानी से हो जाती है। बैक्टीरियल वजायनल इन्फेक्शन से बचने के लिए डॉक्टर माइल्ड, नॉनडिओड्रेंट सोप लगाने की सलाह देते हैं। सेक्स के दौरान सेफ्टी वजायनल इन्फेक्शन से बचाने का काम कर सकती है। डॉक्टर ने जो भी सावधानीयां बरतनें को कही हैं, उसका पालन करें। दवा का कोर्स पूरा करेंगे, तो समस्या से राहत मिल सकती है।

पेल्विक रिलेटेड इश्यू  ( Pelvic related issue)   से बचाव

पेल्विक रिलेटेड इश्यू का ट्रीटमेंट सही समय पर न कराया जाए, तो कॉम्प्लीकेशन बढ़ सकते हैं। पेल्विक इंफ्लमेटरी डिजीज का ट्रीटमेंट न कराने पर रिप्रोडक्टिव ऑर्गन डैमेज हो सकते हैं। पेल्विक इंफ्लमेटरी डिजीज के कारण एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, इनफर्टिलिटी, क्रॉनिक पेल्विक पेन की समस्या हो सकती है। सावधानी के तौर पर आपको सेफ सेक्स करना चाहिए। अगर आपको किसी भी तरह की दिक्कत का एहसास हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।  पेल्विक इंफ्लमेटरी डिजीज होने पर आप अपने पार्टनर को भी जांच कराने के लिए कहें। डॉक्टर ने जो भी सावधानी बरतने के लिए कही हो, उस पर ध्यान दें।

थायरॉइड डिजीज ( Thyroid Disease) से बचाव

थायरॉइड के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। डॉक्टर टीएसएच हॉर्मोन के लेवल को चेक करेगा। थायरॉइड की बीमारी होने पर डॉक्टर आपको रोजाना खाली पेट दवा खाने की सलाह देगा। साथ ही डॉक्टर कुछ समय के अंतराल में दोबारा टेस्ट कराने की सलाह भी दे सकता है। थायरॉइड की समस्या से निपटने के लिए आपको तनाव से दूर रहना होगा। आप रोजाना एक्सरसाइज शुरू कर दें। एक्सरसाइज करने से वेट को कंट्रोल किया जा सकता है।

मेनोपॉज  (Menopause) के लक्षणों से ऐसे करें बचाव

अगर आपको मेनोपॉज के लक्षणों से छुटकारा नहीं मिल रहा है, तो आपको लाइफस्टाइल में बदलाव की जरूरत है। आपको डायट में पौष्टिक आहार शामिल करना चाहिए। साथ ही एक्सरसाइज के माध्यम से वेट कंट्रोल करना चाहिए। आप मेडिटेशन का सहारा भी ले सकती हैं। अगर आपको अधिक समस्या महसूस हो रही है, तो बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से संपर्क करें। थकान की समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टर आपको सप्लिमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं।

महिलाओं में होनेवाली समस्याओं के लिए कौन-कौन से स्क्रीनिंग टेस्ट मौजूद हैं?

उम्र बढ़ने के साथ ही महिलाओं की प्रतिरोधक क्षमता में कमी आने लगती है। महिलाओं में 40 साल के बाद बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। उम्र बढ़ने के साथ ही हड्डियों का कमजोर होना, वेट बढ़ना, थायरॉयड की समस्या, डिप्रेशन आदि का खतरा बढ़ने लगता है। डॉक्टर स्क्रीनिंग टेस्ट के दौरान उपरोक्त दी गई बीमारियों की जांच करते हैं। महिलाओं में 20 से 30 साल की उम्र में कैंसर का अधिक खतरा रहता है। जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास रहा हो, उन्हें स्क्रीनिंग टेस्ट जरूर कराना चाहिए।

  • पैप स्मीयर टेस्ट
  • मैमोग्राफी
  • एचपीवी टेस्टिंग
  • ऑस्टियोपोरोसिस स्क्रीनिंग टेस्ट
  • स्किन कैंसर के लिए स्क्रीनिंग
  • हाई ब्लड प्रेशर के लिए स्क्रीनिंग
  • कोलेस्ट्रॉल के लिए टेस्ट
  • डायबिटीज के लिए स्क्रीनिंग
  • एचआईवी स्क्रीनिंग टेस्ट
  • ग्लूकोमा स्क्रीनिंग टेस्ट

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महिलाओं में होने वाले हॉर्मोनल चेंजेस

उम्र के साथ महिलाओं में होने वाले हॉर्मोनल बदलाव कॉमन हैं। हॉर्मोन में बदलाव के कारण पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। साथ ही हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। कुछ महिलाएं वजायना में सूखापन महसूस करती हैं। इनफर्टिलिटी की समस्या, वजन बढ़ जाना, आवाज का भारीपन, बालों का गिरना, फेस, नेक और चेस्ट में बालों की अधिक ग्रोथ आदि हॉर्मोनल चेंजेस के कारण दिखने वाले लक्षण हैं।
निम्न कारणों के कारण हॉर्मोन का स्तर आसान्य हो सकता है।

  • क्रोनिक या एक्ट्रीम स्ट्रेस
  • टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज
  • अंडरएक्टिव थायरॉयड
  • ओवरएक्टिव थायरॉयड
  • खराब डायट और न्यूट्रीशन
  • मोटापा
  • आयोडीन की कमी
  • कीमोथेरिपी
  • एलर्जी रिएक्शन के कारण
  • कैंसर

अगर आपको शरीर में किसी प्रकार के बदलाव नजर आ रहे हैं, तो बेहतर होगा कि उसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर समस्या का इलाज कराने से बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है।

मेन्टल हेल्थ

महिलाओं की मेन्टल हेल्थ पुरुषों की मेन्टल हेल्थ से अलग होती है। महिला और पुरुष का केवल शारीरिक ढांचा ही अलग नहीं होता है बल्कि साइकोलॉजिकल मेकअप भी अलग होता है। महिलाओं और पुरुषों के दिमाग का स्ट्रक्चर अलग होता है। दोनों के सोचने का तरीका भी अलग होता है। महिलाओं का स्ट्रेस के प्रति रिएक्शन पुरुषों की तरह नहीं होता है बल्कि उनसे अलग होता है। अच्छी हेल्थ से मतलब हेल्दी फिजिकल और मेंटल हेल्थ से है। महिलाओं में स्ट्रेस, डिप्रेशन आदि की समस्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। आज के समय में महिलाएं घर और बाहर, दोनों जगह की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। ऐसे में स्ट्रेस का होना लाजमी है। लंबे समय तक स्ट्रेस की समय डिप्रेशन का कारण बन सकती है। कुछ मेन्टल हेल्थ कंडीशन, जैसे कि डिप्रेशन और बायपोलर डिसआर्डर पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को अधिक प्रभावित करते हैं। सीरियस मेन्टल हेल्थ कंडीशन से बचाव मुश्किल हो जाता है। अगर महिलाएं मेन्टल हेल्थ को ठीक रखना चाहती हैं, तो उन्हें मानसिक बदलाव दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

 मेन्टल हेल्थ के लिए मौजूद उपाय

मेन्टल हेल्थ की समस्या के कारण महिलाएं स्ट्रेस में रहती हैं और उन्हें शारीरिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, अपसेट स्टमक, बैक पेन, रिलेशनशिप कॉनफ्लिक्ट, सोने में समस्या, एब्डॉमिनल वेट गेन आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्ट्रेस की समस्या को निम्न विधियों के माध्यम से मैनेज किया जा सकता है।

  • थेरिपी
  • प्रेयर
  • मेडिटेशन
  • योगा
  • एक्सरसाइज

अगर आप उपरोक्त तरीकों को अपनाते हैं, तो मेन्टल हेल्थ में सुधार किया जा सकता है। अगर आपने पहले कभी योग या मेडिटेशन नहीं किया है, तो आप एक्सपर्ट की हेल्प भी ले सकती हैं। मेन्टल हेल्थ को दुरस्त करने के लिए महिलाओं को खुद के लिए भी समय निकालना चाहिए। बिजी दिनचर्या और अधिक मेहनत के चलते महिलाएं खुद के लिए समय नहीं निकालती हैं। ये कारण महिलाओं को मानसिक रूप से बीमार करते हैं। अपनी हॉबी को एंजॉय करके, पसंदीदा लोगों से बातें करके, अच्छा म्युजिक सुनकर, फेवरेट बुक पढ़कर मेन्टल हेल्थ को दुरस्त बनाया जा सकता है।

मेंस्ट्रुएशन प्रॉब्लम्स

मेंस्ट्रुएशन प्रॉब्लम्स के अन्तर्गत महिलाओं को बहुत-सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग यानी मेनोरेजिया की समस्या मुख्य है।पीरियड्स के दौरान होने वाली अधिक ब्लीडिंग को मेनोरेजिया (Menorrhagia) कहा जाता है। मेनोरेजिया के कारण महिलाओं को कमजोरी और थकान का एहसास होता है। साथ ही शरीर में खून की कमी भी हो सकती है। ऐसा हॉर्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के बैलेंस के बिगड़ जाने के कारण होता है। इस कारण से महिलाओं को हैवी पीरियड्स होते हैं। मेंस्ट्रुएशन प्रॉब्लम्स के कारण महिलाओं को कंसीव करने में भी समस्या का सामना करना पड़ता है।

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वीमेंस फिटनेस : कौन कौन से ऐसे कारगर उपाय हैं, जिससे महिलाऐं अपनी सेहत बेहतर बनाए रख सकती हैं?

शरीर की फिटनेस के लिए एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है। एक्सरसाइज के दौरान शरीर के सभी भागों का शामिल होना बहुत जरूरी है। पैर,हाथ, बैक, एब्स, लोअर बैक आदि को एक्सरसाइज में जरूर शामिल करें। यहां हम आपको महिलाओं के लिए कुछ जरूरी एक्सरसाइज के बारे में बताने जा रहे हैं। महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार दी गई एक्सरसाइज कर सकती हैं।

लेग्स वर्कआउट

लेग्स वर्कआउट के लिए आपको रोजाना कुछ एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए। आप गोब्लेट स्क्वाट ( Goblet Squat), बैंडेड लेटरल वॉक (Banded Lateral Walk),सिंगल-लेग डेडलिफ्ट (Single-Leg Deadlift), सूमो डेडलिफ्ट (Sumo Deadlift), स्टेबिलिटी बॉल ब्रिज (Stability Ball Bridge),स्क्वॉट्स विद हील रेज, सूटकेस डेडलिफ्ट (Suitcase Deadlift) आदि एक्सरसाइज की हेल्प से लेग्स स्ट्रेंथ बढ़ा सकती हैं। एक्सरसाइज करने से पहले एक्सपर्ट से परामर्श जरूर लें।

चेस्ट वर्कआउट

जब चेस्ट वर्कआउट की बात आती है तो स्टैंडर्ड पुशअप्स को बेस्ट माना जाता है। आप चेस्ट वर्कआउट में बियर प्लैंक शोल्डर टैप (Bear Plank Shoulder Tap),आइसोमेट्रिक चेस्ट स्क्वीज (Isometric Chest Squeeze), पुशअप्स, इनलाइन पुशअप्स (Incline Pushup), माउंटेन क्लाइंबर पुशअप्स (Mountain Climber Pushup),डंबल फ्लोर प्रेस (Dumbbell Floor Press), सीटेड इनरोल्ड प्रेस (Seated Arnold Press) आदि की जा सकती है। आपको चेस्ट वर्कआउट के बारे में पहले एक्सपर्ट से जानकारी लेनी चाहिए।

बैक वर्कआउट

महिलाओं में बैक पेन की समस्या आम होती है। कमर दर्द की समस्या कई कारणों से हो सकती है। अधिक काम या फिर एक ही पुजिशन में लगातार बैठने से कमर दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में महिलाओं को बैक एक्सरसाइज की हेल्प लेनी चाहिए। बैक एक्सरसाइज में अपराइट रो (Upright Row), रिवर्स फ्लाई (Reverse Fly),एसेंट्रिक बेंट ओवर रो (Eccentric Bent Over Row), बर्ड डॉग (Bird Dog), सिंगल आर्म बेंट-ओवर रो (Single-Arm Bent-Over Row), बेंट ओवर रो (Bent Over Row) आदि बैक एक्सरसाइज कर सकते हैं।

एब्स वर्कआउट

स्ट्रॉन्ग कोर के लिए एब्स एक्सरसाइज बहुत जरूरी है। आप एब्स एक्सरसाइज के लिए डेडबग (Deadbug), प्लैंक (Plank), साइड प्लैंक, रिवर्स क्रंच ( Reverse Crunch), लेटरल बियर वॉक हील क्रंच आदि कर सकती हैं। शरीर से फैट को कम करने के लिए आपको एब्स एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए। आप एब्स एक्सरसाइज के दौरान ट्रेनर की हेल्प जरूर लें।

लोअर बैक वर्कआउट

जो महिलाएं घर और ऑफिस के काम को संभालती हैं, उन्हें लोअर बैक की समस्याओं का अधिक सामना करना पड़ता है। एक ही स्थान पर लंबे समय तक बैठे रहने से लोअर बैक में प्रॉब्लम हो सकती है। ऐसे में लोअर बैक स्ट्रेचिंग बहुत जरूरी है। लोअर बैक स्ट्रेचिंग के लिए महिलाओं की पीठ का लोअर हिस्सा स्ट्रॉन्ग होता है और बहुत राहत का एहसास भी होता है। आप ब्रिज पोज की मदद से स्ट्रेचिंग कर सकती हैं। इसमे आपको जमीन में पीठ के बल लेटना है और पैरो को फोल्ड करना है। अब पैरों की मदद से अपने निचले हिस्से यानी बैक को ऊपर की ओर उठाना है। इस दौरान अपने हाथों को जमीन पर ही रखें। आप कुछ स्ट्रेचिंग जैसे कि काऊ स्ट्रेच, नी टू चेस्ट स्ट्रेच भी कर सकती हैं।

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क्रॉसफिट वर्कआउट

जिन महिलाओं को अधिक वजन यानी मोटापे की समस्या है, वो लोग क्रॉसफिट वर्कआउट कर सकती हैं। क्रॉसफिट वर्कआउट करने से महिलाओं की मसल्स को मजबूती मिलेगी। साथ ही मसल्स की फ्लेक्सिबिलिटी भी बढ़ेगी। क्रॉसफिट वर्कआउट आप ट्रेनर की हेल्प से कर सकती हैं। इस वर्कआउट में कुछ इक्युपमेंट की जरूरत पड़ती है। कुछ क्रॉसफिट वर्कआउट जैसे कि रिंग रोज, बॉक्स जंप, केटलबेल स्विंग, एयर स्क्वॉट आदि को किया जा सकता है। आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, बेहतर होगा कि आप इस बारे में अपने ट्रेनर से जरूर पूछें।

जुम्बा

जुम्बा म्यूजिक और डांस के कॉम्बिनेशन से बना बेहतरीन वर्कआउट है। अगर आपको डांस करना पसंद है तो आप जुम्बा की हेल्प से शरीर को फिट रख सकते हैं। टेंशन को कम करने के लिए, बॉडी को फिट रखने के लिए जुम्बा का अभ्यास किया जा सकता है। जुम्बा का रोजाना अभ्यास करने से हड्डियां मजबूत होती हैं। मेन्टल हेल्थ को दुरस्त करने के लिए आप जुम्बा को जरूर अपनी दिनचर्या में शामिल करें। जिन महिलाओं को मोटापे की समस्या है, वो भी जुम्बा की मदद ले सकती हैं।

योग

योग का रोजाना अभ्यास आपकी मेन्टल हेल्थ को दुरस्त रखने का काम करेगा। योग करने के लिए आपको ज्यादा समय की आवश्यकता नहीं होती है। अगर आप रोजाना आधे से एक घंटे भी योग करती हैं, तो आपको बहुत से शारीरिक और मानसिक फायदे देखने को मिल सकते हैं। मांसपेशियों को स्ट्रॉन्ग करने के लिए सेतु बांध आसन, बॉडी को फ्लेक्सिबल बनाने के लिए गोमुख आसन, कंधे स्ट्रॉन्ग करने के लिए नटराज आसन, स्टमक प्रॉब्लम को दूर करने के लिए हलासन, कपालभाति प्राणायाम, योगमुद्रासन  आदि किया जा सकता है। अगर आपको पहले से कोई बीमारी है तो योग करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।

फैट बर्निंग/ लॉस वर्कआउट

फैट बर्न करने के लिए महिलाएं वॉक से शुरूआत कर सकती हैं। नेक्स्ट स्टेप में साइकलिंग, जॉगिंग, साइकलिंग, वेट ट्रेनिंग, स्वीमिंग आदि एक्सरसाइज को फॉलो किया जा सकता है। फैट को बर्न करने के लिए आपको अपनी डायट पर भी ध्यान देने की जरूरत है। अपने ट्रेनर से एक्सरसाइज के साथ ही डायट प्लान के बारे में भी जानकारी लें।

पिलाटे एक्सरसाइज

मसल्स को स्ट्रॉन्ग करने के लिए महिलाएं पिलाटे एक्सरसाइज कर सकती हैं। पिलाटे एक्सरसाइज करने से स्टमक, हिप्स और लोअर बैक की मसल्स मजबूत होती हैं। जिन महिलाओं में पेट बाहर की ओर निकला हुआ होता है, वो पिलाटे एक्सरसाइज की हेल्प से पेट को शेप में ला सकती हैं। अगर ये कहा जाए कि पिलाटे एक्सरसाइज हर अंग की मसल्स को स्ट्रॉन्ग बनाता है, तो ये गलत नहीं होगा।

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वीमेंस डायट : महिलाओं के लिए डायट

हम जो कुछ भी खाते हैं, उसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। अगर आप सिर्फ पेट भरने के लिए खाएंगी, तो आपके शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाएगा। आपकी बॉडी के टाइप के अकॉर्डिंग ही आपको डायट प्लान करना चाहिए। आप स्पेशल डायट के बारे में डायट एक्सपर्ट से भी बात कर सकती हैं। अगर आपको कोई हेल्थ कंडीशन है तो आपकी डायट में चेंजेस हो सकते हैं। यहां हम आपको कुछ स्पेशल डायट के बारे में बताने जा रहे हैं।

फैट लॉस डायट

फैट लॉस डायट में आपको खाने में शुगर और ड्रिंक्स को इग्नोर करना होगा। ब्रेकफास्ट में हाई प्रोटीन फूड को शामिल करें। खाने के बाद में नहीं बल्कि पहले पानी पिएं। खाने को जल्दबाजी में न खाएं। ऐसा करने से खाने का पाचन ठीक से नहीं हो पाएगा। आप खाने में प्रोटीन के लिए मीट, फिश, एग, प्लांट बेस्ट प्रोटीन जैसे कि बींस, टोफू, दालें आदि शामिल कर सकती हैं

कीटो डायट

कीटो डायट को स्पेशल डायट इसलिए माना जाता है क्योंकि ये वेट लॉस के लिए अपनाई जाती है। कम कार्ब्स और ज्यादा फैट वाले फूड को खाने में शामिल करें। कीटो डायट अपनाने से शरीर कीटोसिस मेटाबॉलिक प्रोसेस में चला जाता है। आप खाने में सीफूड्स, लो कार्ब वेजीटेबल्स, चीज, मीट, कोकोनट ऑयल, प्लेन ग्रीक योगर्ट आदि शामिल कर सकती हैं। इस बारे में अपने डायट एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।

एक्टोमॉर्फ डायट

एक्टोमॉर्फ डायट की जरूरत एक्टोमॉर्फ बॉडी टाइप वीमन्स को पड़ सकती है। एक्टोमॉर्फ बॉडी( Ectomorph body) से मतलब पलती दुबली बॉडी से है। स्किनी वीमन्स एक्टोमॉर्फ बॉडी टाइप डायट से सकती हैं।एक्टोमॉर्फ बॉडी टाइप डायट में कार्बोहाइड्रेट युक्त फूड, प्रोटीन, फैट से भरपूर फूड को खाने में शामिल कर सकती हैं। एक्टोमॉर्फ डायट की हेल्प से वेट गेन किया जा सकता है। आपको जब तक भूख लगे, खाना जरूर खाएं। साथ ही वेट गेन वर्कआउट भी करें।

हाय प्रोटीन डायट

हाय प्रोटीन डायट के लिए महिलाओं को खाने में उन फूड को शामिल करना चाहिए, जो प्रोटीन से भरपूर हो। प्लांट बेस्ट प्रोटीन और एनिमल बेस्ट प्रोटीन डायट को खाने में शामिल करें। खाने में दालें, एग, सीफूड्स, बींस, पनीर, चीज, लीन मीट, चिकन, डेयरी प्रोडक्ट आदि शामिल करें।

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लीन डायट

अगर आपको लीन मसल्स चाहिए तो आपको न्यूट्रीशन के साथ ही फिजिकल एक्टिविटी पर भी ध्यान देना होगा। खाने में आपको हाई प्रोटीन फूड शामिल करने चाहिए। साथ ही खाने में कार्ब और फैट फूड्स भी शामिल करें। खाने में एग्स, सेलमोन, चिकन ब्रेस्ट, ग्रीक योगर्ट, टूना (Tuna), लीन बीफ (Lean Beef), सोयाबीन (Soybeans), टर्की ब्रेस्ट (Turkey Breast), प्रोटीन सप्लिमेंट आदि लेना चाहिए। ये सभी वेट गेन फूड्स हैं जो वजन को बढ़ाने का काम करते हैं।

बल्किंग डायट

मसल्स गेनिंग के लिए बल्किंग डायट (Bulking Diet) अपनाई जाती है। बल्किंग डायट फैट मास को इंक्रीज करता है। बल्किल डायट में स्टार्च से भरपूर सब्जियां, अनाज की पर्याप्त मात्रा, मीट, डेयरी प्रोडक्ट, सीफूड्स, एग, ब्लैक बींस, नट्स बटर, बेवरेज विटआउट एडेड शुगर आदि शामिल करना चाहिए।

वेट लॉस डायट

वेट लॉस के लिए आपको भूखा रहने की जरूरत नहीं है। आपको खाने में हेल्दी फूड को शामिल करना चाहिए। आप दिन की शुरुआत नींबू पानी के साथ कर सकती हैं। खाने में ऐसे फूड को शामिल करें, जो फैट को शरीर पर जमने न दें। खाने में फ्रूट्स, अनाज, वेजीटेब्लस को जरूर शामिल करना चाहिए। खाना बनाते समय ऑयल का कम यूज करें। खाने में सलाद की ज्यादा मात्रा शामिल करें। रोजाना सात से आठ ग्लास पानी जरूर पिएं।

50 से अधिक उम्र की महिला के लिए डायट

उम्र बढ़ने के साथ ही महिलाओं के शरीर में पोषण की कमी होने लगती हैं। उम्र बढ़ने के साथ ही हड्डियों का कमजोर होना, बालों का गिरना, आंखे कमजोर होना, थकान का एहसास आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में खाने में प्रोटीन, कार्ब, मिनिरल्स, विटामिंस आदि को जरूर शामिल करें। कैल्शियम के लिए दूध, पनीर, दही आदि का सेवन जरूर करें। फ्रूट्स, वेजीटेबल्स, अनाज, डेयरी प्रोडक्ट आदि को खाने में जरूर शामिल करें। आप डायट एक्सपर्ट से भी बात कर सकती हैं।

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लाइफस्टाइल से जुड़ी तकलीफें

महिलाओं की दिनचर्या में खुद के लिए बहुत कम समय शामिल होता है। उनका पूरा दिन घर-परिवार के काम में बीत जाता है। ऐसे में हेल्दी डायट, एक्सरसाइज, खुद के लिए समय आदि बातें बहुत पीछें रह जाती हैं। ऐसी महिलाओं की संख्या बहुत कम है, जो घर और ऑफिस के कामों के बीच हेल्दी लाइफस्टाइल मेंटेन कर पाएं। महिलाएं खुद की जरूरतों को परिवार की जरूरतों से पीछे रखती हैं। इन्हीं कारणों से महिलाएं खुद को बीमार कर लेती हैं।

लाइफस्टाइल ठीक करने के उपाय

महिलाओं के लिए हेल्थ टिप्स के बारे में हम आपको यहां कुछ बातें बताने जा रहे हैं। अच्छी सेहत का राज अच्छी लाइफस्टाइल में छुपा है। अगर कुछ बातों पर ध्यान दिया जाए, तो महिलाएं हेल्दी लाइफ जी सकती हैं।

  • जब आप खुद का ख्याल रखेंगी, तभी अपनों का ख्याल रख पाएंगी। अपने स्वास्थ्य के साथ समझौता न करें।
  • घर में सभी सदस्यों के लिए जब हेल्दी फूड बनाएं, तो उनके साथ आप भी खाएं।
  • रोजाना खुद के लिए समय जरूर निकालें। खाली समय में अपनी हॉबी को एंजॉय करें।
  • खाना सही समय पर खाएं।
  • एक्सरसाइज के लिए खुद को पूरा समय दें।
  • नींद लेने के समय काम बिल्कुल न करें। रोजाना सात से आठ घंटे की नींद लें।
  • बॉडी टाइप के अनुसार डायट चार्ट बनाएं और उसे फॉलो करें।

पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को अपनी सेहत का ख्याल रखने की ज्यादा जरूरत है। अब महिलाऐं घर और ऑफिस दोनों संभालती है, ऐसे में सेहत से जुड़ी चुनौतियां भी दुगुनी हो गई हैं। समय रहते अपनी परेशानियों का हल निकाल लिया जाए, तो महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधि अधिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। आप स्वास्थ्य संबंधि अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है


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